सच्चाई का दीपक


सच्चाई का दीपक

किसी छोटे से गाँव में रामू नाम का एक लड़का रहता था। उसने बहुत मेहनत की थी और अपनी माँ का पेट भरने के लिए अपना पेट भरने के लिए एक दिन में काम करना शुरू कर दिया था। गाँव के जमींदार, ठाकुर सिंह, बहुत अमीर और घमंडी थे। वे गरीबों का अपमान करते थे और उनकी बेगारी करवाते थे।

एक दिन, ठाकुर सिंह ने पूरे गांव में घोषणा की कि जो कोई उन्हें सबसे सुंदर और महंगा उपहार देगा, उसे वे अपना खास दोस्त बना लेंगे और सारा सारा दिलासा देंगे। गाँव के सभी अमीर लोग तरह-तरह के बेशकीमती उपहार लेकर ठाकुर सिंह के पास से आये। किसी ने सोने के आभूषण का विवरण दिया, तो किसी ने रेशमी वस्त्र और स्टोर-जवाहरात का।

रामू के पास तो देने के लिए कुछ भी नहीं था। वह उदास होकर एक पेड़ के नीचे बैठा और देखने लगा कि वह क्या करेगा। तभी उसे एक चमचमाती हुई चीज़ दिखाई दी। पास ही देखा तो एक छोटा सा मिट्टी का दीपक था, जिसमें तेल भरा हुआ था और जल रहा था।

रामू को अचानक एक विचार आया। वह उस दीपक को लेकर ठाकुर सिंह के दरबार में आ गया। वहां पहले से ही बहुत भीड़ थी और सभी लोग अपने-अपने उपहार दिखा रहे थे। जब रामू की बारी आई, तो उसने साधारण सा मिट्टी का दीपक ठाकुर सिंह के सामने रख दिया।

ठाकुर सिंह यह देख कर लाल हो गये। उन्होंने रामू का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "अरे ओ गरीब लड़के! यह मिट्टी का दीपक क्या है? क्या तुम मेरा अपमान करने आये हो?"

रामू ने कहा, "नहीं, ठाकुर साहब। मेरे पास आपके लिए कुछ और नहीं है। लेकिन यह धार्मिक सच्चाई का प्रतीक है। यह अँधेरे में रोशनी देता है और हमें सही रास्ता दिखाता है। मेरे लिए यही सबसे अनमोल उपहार है।"

ठाकुर सिंह रामू की बात सुनकर हैरान रह गए। उन्होंने कभी किसी गरीब को इतनी गहराई से बाहर निकलने के बारे में नहीं बताया था। रामू की आँखों में थी सच्चाई की चमक। ठाकुर सिंह को अपनी सहजता का एहसास हुआ। उन्हें लगा कि सात्विक मित्र और असली धन के आंकड़े से नहीं, बल्कि अच्छे विचार और ईमानदारी से मिलते हैं।

उन्होंने रामू से गले मिलकर कहा, "तुम ही मेरे मित्र हो। यह छोटा सा दीपक उन सभी सरकारी उपहारों से कहीं ज्यादा कीमती है।"

उस दिन से ठाकुर सिंह का व्यवहार बदल गया। उन्होंने गरीबों का सम्मान करना शुरू कर दिया और गांव में न्याय और ईमानदारी का मोहरा बन गया। रामू का वह छोटा सा मिट्टी का दीपक हमेशा सच्चाई और विश्वसनीयता की प्रेरणा बना रहा।

जानें: बाहरी दिखावे और धन-दौलत से अधिक महत्वपूर्ण सच्चाई, विश्वसनीयता और अच्छे विचार होते हैं। यही जीवन के सात्विक दीपक हैं जो हमें सही राह 

दिखाएँ हैं।

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