सच्चाई का दीपक किसी छोटे से गाँव में रामू नाम का एक लड़का रहता था। उसने बहुत मेहनत की थी और अपनी माँ का पेट भरने के लिए अपना पेट भरने के लिए एक दिन में काम करना शुरू कर दिया था। गाँव के जमींदार, ठाकुर सिंह, बहुत अमीर और घमंडी थे। वे गरीबों का अपमान करते थे और उनकी बेगारी करवाते थे। एक दिन, ठाकुर सिंह ने पूरे गांव में घोषणा की कि जो कोई उन्हें सबसे सुंदर और महंगा उपहार देगा, उसे वे अपना खास दोस्त बना लेंगे और सारा सारा दिलासा देंगे। गाँव के सभी अमीर लोग तरह-तरह के बेशकीमती उपहार लेकर ठाकुर सिंह के पास से आये। किसी ने सोने के आभूषण का विवरण दिया, तो किसी ने रेशमी वस्त्र और स्टोर-जवाहरात का। रामू के पास तो देने के लिए कुछ भी नहीं था। वह उदास होकर एक पेड़ के नीचे बैठा और देखने लगा कि वह क्या करेगा। तभी उसे एक चमचमाती हुई चीज़ दिखाई दी। पास ही देखा तो एक छोटा सा मिट्टी का दीपक था, जिसमें तेल भरा हुआ था और जल रहा था। रामू को अचानक एक विचार आया। वह उस दीपक को लेकर ठाकुर सिंह के दरबार में आ गया। वहां पहले से ही बहुत भीड़ थी और सभी लोग अपने-अपने उपहार दिखा रहे थे। जब रामू की बारी आई, तो उसने सा...